अम्बपालि गणिका से वेश्यातक

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पुस्तकाचे नाव अम्बपालि गणिका से वेश्यातक
लेखक चित्रलेखा कौसल
ISBN --
भाषा Select Book Language
पुस्तक बांधणी पेपरबॅक
पानांची संख्या ४८
आकार ५.५ * ८.५ इंच
वजन ४० ग्रॅम

Description

त्रिपीटक साहित्य में गणिका अम्बपालि का उल्लेख मिलता है। जीसे भौतीक जीवन को त्यागकर बुध्द की शरण में जाते हुये देखते है। अम्बपालि कौन थी? उसके जीवन की पृष्ठभूमी क्या थी? और उसे इतना महत्व क्यो दिया गया?

किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को जानने के लिए उपरोक्त सवाल खडे होना लाजमी है। पर सभी सवालो के जवाब सही/गलत के दायरे से बाहर रखने होते है। प्राप्त परिस्थिती में वह व्यक्ति क्या निर्णय लेता हैं वह स्वयं भी अनुमान नही लगा पाता और उसके मरणोपरान्त तो उसे किसी भी कटघरे में खड़ा किया जाये तो, वह अपनी सफाई भी नही दे सकता।

अम्बपालि भी ऐसा ही एक ऐतिहासीक ‘व्यक्तित्व’ है, जिसपे बहुत कुछ खरी-खोटी सुनायी गयी। जिस चौखट में उसे कैद किया गया। वह उसका चुनाव नही था।

चूप्पी तोडकर खुलकर बोलने का समय आ गया है की आखिरकार वह गणिका क्यों बनी थी? क्या साजिश थी इसके पिछे ? कौन जिम्मेदार था?

यह बुकलेट, अम्बपालि पर बात करती है। उसके अतीत, भविष्य और वर्तमान पर सफाई देना चाहती है।

तो जानिए अम्बपालि वेश्या क्यों बनी ?
(हे पुस्तक हिंदी मध्ये आहे.)

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